ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध का भारतीय उद्योगों पर गहरा और तत्काल प्रभाव
आपके द्वारा प्रस्तुत विवरण से स्पष्ट है कि फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर बहुत गहरा और तत्काल प्रभाव पड़ा है। इसे हम अलग-अलग सेक्टरों में विस्तार से समझ सकते हैं: 1. ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं: युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में 10–13% की बढ़ोतरी हुई। चूँकि भारत अपने तेल का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसका सीधे आयात बिल पर असर पड़ा है। LPG और LNG संकट: लगभग 91% LPG खाड़ी देशों से आता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण: घरेलू सिलेंडरों की कीमतें ₹60 तक बढ़ीं। वाणिज्यिक सिलेंडरों की कीमतें ₹114–115 तक बढ़ीं। उत्पादन लागत में वृद्धि: पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल (टायर, पेंट, रसायन, उर्वरक) के लिए लागत बढ़ी, जिससे मुनाफे पर दबाव पड़ा। निष्कर्ष: ऊर्जा संकट ने सीधे इंडस्ट्रियल इनपुट लागत और घरेलू कीमतों को प्रभावित किया है। 2. निर्यात और लॉजिस्टिक शिपिंग मार्ग में बाधा: लाल सागर और हॉर्मुज के मार्ग असुरक्षित होने से जहाजों को ‘केप ऑफ गुड होप’ क...